क्या कहते हो, शेख, नरक में हमें तपाएगी ज्वाला, आने के ही साथ जगत में कहलाया 'जानेवाला', सौ सुधारकों का करती है काम अकेले मधुशाला।।५७। धर्मग्रन्थ सब जला चुकी है, जिसके अंतर की ज्वाला, जगती की शीतल हाला सी पथिक, नहीं मेरी हाला, दुनियावालों, किन्तु, किसी दिन आ… Read More